Historical Bhanphad Fair 100 वर्षों से भी अधिक समय से मनाया जा रहा यह ऐतिहासिक भंफड मेला

भारत की संस्कृति और परंपराओं में मेलों का विशेष स्थान रहा है। इन्हीं में से एक है Historical Bhanphad Fair भमफड़ मेला, जो 100 वर्षों से भी अधिक समय से मनाया जा रहा है। यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्रीय एकता और सांस्कृतिक धरोहर का भी उदाहरण प्रस्तुत करता है। महादेव और जाबल नारायण जी द्वारा इस मेले का शुभारंभ किया जाता है। पुराने समय में जब लोगों का मुख्य वयवसाय कृषि व भेड़ बकरी पालन हुआ करता था पूरी साल लोग कई प्रकार के अनाज उगाते थे जिनका कार्य भादो (अगस्त) आते आते ख़तम हो जाता था जिस कारण भी इस मेले का महत्व काफी बढ़ जाता था।

historical Bhanphad fair
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प्रधान जाबाल नारायण मंदिर कमिटी ने बताया की भंफड का जो मेला होता है वह एक ऐतिहासिक मेला है इस मेले में जाबल नारायण ओर महादेव का मिलन होता है आम जनता का भी आपस में मिलन होता है साथ ही उन्होंने बताया की इस मेले में महत्वपूर्ण भूमिका जाबल नारायण की होती है !

प्रधान जाबाल नारायण मंदिर कमिटी

जाबाल नारायण जब अपने 35 गांव के दौरे में लिकलते है तो जब भंफड नामक स्थान पर पहुंचते है तो वहां महादेव और जाबाल नारायण के मिलन के अवसर पर यह मेला मनाया जाता है। तीन दिन तक होने वाला यह मेला दो दिन में भंफड में मनाया जाता है और मेले का तीसरा दिन इंटाली नामक स्थान पर मनाया जाता है इस मेले में 35 गांव के लोग जाबल नारायण के साथ शरीख होते है !

भमफड़ मेले का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

यह ऐतिहासिक मेला देवता साहब जब्बल नारायण और देवता साहब महादेव की पवित्र उपस्थिति में आयोजित किया जाता है। विशेष रूप से, देवता साहब जब्बल नारायण के अधीन 35 गाँव आते हैं, जो इस मेले को एक विराट धार्मिक आयोजन बनाते हैं।

जब देवता साहब जब्बल नारायण भमफड़ पहुँचते हैं, तब इस मेले का आयोजन किया जाता है। यह अवसर श्रद्धालुओं के लिए असीम भक्ति और आस्था से भरपूर होता है। इस दौरान भक्तजन बड़ी संख्या में एकत्र होते हैं और देवताओं की वंदना करते हैं।

Jabal Narayan , Mahadev

Historical Bhanphad Fair मुख्य आकर्षण :-

इस मेले में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ देखने को मिलती हैं:-

  1. देवताओं की शोभायात्रा – देवता साहब जब्बल नारायण और देवता साहब महादेव की भव्य पालकी यात्रा इस मेले का सबसे बड़ा आकर्षण होती है। इस यात्रा के दौरान भक्तों का उत्साह देखने लायक होता है।
  2. पारंपरिक नृत्य एवं संगीत – लोक संस्कृति को दर्शाने वाले पारंपरिक नृत्य और भजन संध्या इस मेले को और भी खास बना देते हैं।
  3. धार्मिक अनुष्ठान और हवन – श्रद्धालु विशेष पूजा-पाठ और हवन में भाग लेते हैं, जिससे पूरे वातावरण में आध्यात्मिकता की अनुभूति होती है।
  4. स्थानीय बाजार और मेले का उत्साह – विभिन्न तरह की दुकानों और स्वादिष्ट पारंपरिक व्यंजनों के साथ यह मेला व्यापार और आनंद का केंद्र बन जाता है।
  5. ग्रामीण समुदाय का मिलन – चूँकि यह मेला 35 गाँवों के सामूहिक आयोजन का हिस्सा है, इसलिए यह ग्रामीण समुदायों के बीच मेल-जोल और भाईचारे को भी प्रोत्साहित करता है।

ऐतिहासिक भंफड मेला

पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण :-

यह मेला न केवल स्थानीय निवासियों के लिए बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। दूर-दूर से लोग इस मेले में भाग लेने आते हैं और हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने का अवसर प्राप्त करते हैं।

भमफड़ मेला एक धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक समागम है, जो न केवल आस्था को मजबूत करता है, बल्कि क्षेत्रीय एकता को भी बढ़ावा देता है। यह मेला वर्षों से परंपराओं को सहेजते हुए नई पीढ़ियों को अपनी संस्कृति से जोड़ने का कार्य कर रहा है।

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